जशपुरनगरः जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित इस एनीकट से ही पूरे जिला मुख्यालय को जल की आपूर्ति की जाती है। एनीकट को सुरक्षित रखने के लिए कलेक्टर ने इसके आसपास रेत और मिट्टी के उत्खनन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। लेकिन इस प्रतिबंध को दरकिनार करते हुए,यहां प्रतिदिन 50 से 100 ट्रेक्टर के बीच रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। रेत का परिवहन कर रहे ट्रेक्टर चालकों ने बताया कि लावा नदी में रेत का उत्खनन और परिवहन के नाम पर उनसे प्रति ट्रिप 3 सौ रूपये की वसूली की जा रही है। इसमें सौ रूपये सड़क से खेत को पार करके नदी तक पहुंचने और 2 सौ रूपये रायल्टी के नाम पर लिया जा रहा है। लेकिन उन्हें रायल्टी की पर्ची नहीं दी जा रही है। डूमरटोली में लावा नदी में निर्मित इस एनीकट से पूरे शहर को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। जलसंसाधन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित इस एनीकट से जल आपूर्ति की जिम्मेदारी इन दिनों नगरपालिका के हाथों में हैं। रेत से भरे हुए ट्रेक्टर की लगातार आवाजाही से एनीकट के किनारे मिट्टी के कटाव रोकने के लिए बने हुई दीवारों में दरारें आनी लगी है। स्थानीय ग्रामवासियों ने बताया कि एनीकट के नजदीक ही सुबह से लेकर शाम तक प्रतिदिन लगभग सौ ट्रेक्टर रेत का उत्खनन और परिवहन हो रहा है। लगभग डेढ़ माह पूर्व जिले के तात्कालिन कलेक्टर डा रवि मित्तल के निर्देश पर मनोरा के तहसीलदार राहुल कौशिक ने उत्खनन रोकने के लिए कार्रवाई की थी। लेकिन कुछ दिनों तक बंद रहने के बाद अवैध उत्खनन का यह कारोबार इन दिनों फिर शुरू हो गया है। डुमरटोली में लावा नदी पर निर्मित एनीकट दो बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। जल संसाधन विभाग द्वारा एनीकट निर्माण पूरा करने के साल भर के अंदर पहली बारिश में एनीकट का एक बड़ा हिस्सा बह गया था। इस घटना को लेकर जिले में जमकर सियासत हुई थी। इसके दूसरे साल फिर से एनीकट का दूसरा हिस्सा बारिश से क्षतिग्रस्त हुआ था। दो बार क्षतिग्रस्त हो चुके इस एनीकट की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। मिडिया में खबर प्रकाशित होने पर खानापूर्ति के लिए खनिज विभाग एक-दो कार्रवाई कर मामले को रफादफा कर देता है।

एनीकट के समीप चल रहे अवैध उत्खनन के मामले में हमने खनिज अधिकारी से उनका पक्ष लेना चाहा। लेकिन खनिज अधिकारि ने काल रिसीव नहीं किया।
