ब्रेकिंग न्यूज – सरकार के विकास की दावों की पोल खोलती तस्वीर, मूलभूत सुविधाओं से वंचित नगेशिया परिवार,गंदा पानी पीने को मजबूर।

रोबिट गुप्ता – छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लाख दावे कर ले लेकिन बलरामपुर जिले मे एक एसा गांव है आज भी विकास यहा कोसो दुर है. कुसमी विकासखंड क्षेत्र में बसे गांव आज भी विकास चलकर  इस गांव मे नहीं  पहुंच हैं , एक तरफ देश चांद पर जाने की तैयारी कर रहा है तो वहीं दुसरी तरफ हरि ग्राम पंचायत के कुढ़नपानी में  नागेसिया समाज के ग्रामीण नदी नाले की पानी पिने से जीवन जीने को मजबुर हैं।

बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखण्ड के हरी ग्राम पंचयात क्षेत्र में बसा हरि गांव का कुढ़नपानी आज भी बुनियादी सुविधाओं से अलग है एसा लगाता है कि इस गांव के  लिए हुकुमनारो ने विकास कि पन्ना ही बदल दिया है  , जैसे ही अंधेरा होता है यहां के लोग डिबरी की रोशनी और नदी नाले की पानी पिने से मजबूर है और बिजली  आँगनबाढ़ी स्कूल के बिना तरस है  , यहां निवासरत लगभग 50 घरों में 80 लोगों की आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए दुर हो गई है , कहने को तो सरकार की कई योजना लागु हैं , लेकिन विभागीय उदासीनता की वजह से आज तक इन्हें बिजली पानी स्कूल आँगनबारी की सुविधा नहीं मिल पाई।

जब जब चुनाव नजदीक आते हैं तो जन प्रतिनिधि यहां की जनता को वोट के बदले आश्वासन का पुल बांध कर चले जाते हैं और चुनाव खत्म होता है तो व्यवस्थाएं जस की तस रह जाती है , पंचायत चुनाव से पहले जन प्रतिनिधियों ने चुनावी प्रलोभन देने के लिए मुहल्ले में कुछ कह दीये लेकिन अब पिएची विभाग के अधिकारी उस कोई पहल नहीं कर रहे हैं, कुढ़नपानी प्राथमिक शाला स्कूल के लगभग 24 बच्चे आज भी स्वच्छ पानी के लिए तरस बिजली नहीं होने कारण रात को पढ़ाई से वंचित रह जा रहे हैं , यहां के लोगों ने कई बार जन समस्या निवारण शिविरों में अपनी समस्या सुनाई लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला।

सरकार कुपोषित भगाने के लिए या फिर बच्चों की मानसिक विकास के लिए हर गांव में मोहल्ले में आंगनवाड़ी भी नियुक्ति एवं भवन बनाई गई है लेकिन इस गाँव के बच्चों के लिए आज भी आंगनवाड़ी जाने का सपना बनकर रह गया है लोगों का कहना है कि आंगनवाड़ी से ही शिक्षा की शुरुआत होती है लेकिन हमारे गांव में आंगनबाड़ी ही नहीं है तो कैसे पढ़ाई होगा और कैसे बच्चों का मानसिक विकास होगा हम नहीं कर सकते यहां तक की आंगनवाड़ी नहीं होने के कारण अब महतारियों को भी यहां पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है लेकिन किसी तरह जीवन गुजारने को मजबूर हैं इस गांव के लोग ग्रामीण यहां तक कहते हैं कि यहां किसी तरह का सुविधा ही नहीं है इसीलिए तो हम इस गांव में डूबे हुए हैं डूबता हुआ गांव बताना यह सरकार की योजना का कामी साबित हो रही है आखिर योजना बनाती है किस लिए और केवल आसपास के लोगों के लिए तभी तो दूधराज के गांव में आज तक योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है

कुसमी  जनपद पंचायत में विकास की परचम लहराने वाला जनपत पंचायत सीईओ अभिषेक पांडे भी है उसमें विकासखंड में है लेकिन आज भी इस गांव में विकास केवल कागजों में सिमट कर रह गया है, यहां के ग्रामीण कहते हैं कि हम विकास की आसरा तो जोह रहे हैं लेकिन कोई अधिकारी नहीं पंहुचा यहाँ तक की अभिषेक पांडे इस गाँव तक कभी नहीं पंहुचा जनपत पांचयत सी ई ओ को कूलर ऐसी से सायद फुर्सत नहीं मिला जनप्रतिनिधि हमारे गांव की ओर ध्यान ही नहीं देते तो क्या करें इसीलिए तो हमारा गांव आज भी डूबा हुआ सूरज बन कर रह गया है ग्रामीण कह रहे हैं हमारा गांव डूब चुका है,विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामले में गोलमोल जवाब देते हुए ग्रामीणों को जागरूक करने और आवेदन प्राप्त नहीं होने का हवाला देते नजर आ रहे हैं , तो वही मामले में जब पानी की समस्या को लेकर एचपी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आपके द्वारा संज्ञान में आया है कि पानी की समस्या वहां पर है जिसे हम बहुत ही जल्द यह समस्या को दूर करेंगे

ऐसे में यहाँ के लोगों को कब तक नदी नाले ढ़िबरी युग में जिंदगी काटनी पड़ेगी यह देखने वाली बात होगी।

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