रोबिट गुप्ता- जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां एक प्राथमिक शाला बच्चों की पढ़ाई की जगह अब गोदाम और मजदूरों का अस्थायी ठिकाना बनती नजर आ रही है। मामला है ग्राम पंचायत मेघुली के बिच पारा प्राथमिक शाला का, जहां नियमों को ताक पर रखकर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों से खिलवाड़ किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत मेघुली स्थित बिच पारा प्राथमिक शाला में पिछले लगभग छह महीनों से कब्रिस्तान बाउंड्री निर्माण का कार्य चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य में उपयोग होने वाला सीमेंट स्कूल के ही एक कमरे में रखा गया है। इतना ही नहीं, बाउंड्री निर्माण में लगे मजदूरों के रहने और खाने की व्यवस्था भी स्कूल के कमरे में ही कर दी गई है।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि इस कारण उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। बच्चों ने कई बार शिक्षकों से शिकायत की कि सीमेंट हटवाया जाए और स्कूल के कमरों में किसी को ठहरने न दिया जाए, लेकिन शिक्षकों की लापरवाही के चलते आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल निरीक्षण के लिए सीएसी और अन्य अधिकारी नियुक्त हैं, इसके बावजूद अब तक इस गंभीर लापरवाही पर किसी की नजर नहीं पड़ी। सवाल उठता है कि आखिर अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण कर क्या रहे हैं?
स्कूल में सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना हुआ है। मीटर से अवैध तरीके से कनेक्शन लेकर एक तार गेट के बाहर झूलता छोड़ दिया गया है, जिससे कभी भी बच्चों को करंट लग सकता है और बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
यह पूरा मामला शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही को उजागर करता है, जहां बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार शिक्षकों और अधिकारियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।
बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह मामला अब क्या लापरवाह शिक्षक और निरीक्षण अधिकारियों पर होगी कार्रवाई या फिर ऐसे ही स्कूल बनते रहेंगे गोदाम और मजदूरों के ठिकाने?
