DAV स्कूल बगीचा के प्रिंसिपल ने अभिभावक से किया दुर्व्यवहार, कहा बच्चे का कटा लो नाम,UKG के छात्र को चोट लगने का है मामला।

DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल बगीचा के प्रिंसिपल ने पालक के साथ किया अभद्र व्यवहार, UKG क्लास के छात्र को चोट लगने पर पालक को सूचना नही देने का है मामला, स्कूल छुट्टी के बाद जब छात्र बस से घर पहुंचा तो पालक को चोट लगने की हुई जानकारी. एक माह के भीतर उस बच्चे के साथ तीसरी घटना पालक के बार बार निवेदन के बाद भी प्रिंसिपल की अनदेखी।


पूरा मामला बगीचा DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के UKG क्लास का है, जहाँ छात्र खेलते खेलते गिर गया औऱ उसके दोनों घुटने से खून बहने लगा क्लॉस टीचर ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी का परिचय देकर छात्र को प्राथमिक ट्रीटमेंट कर छुट्टी के बाद बस से स्कूल भेज दिया. स्कूल में सभी टीचर का मोबाइल स्कूल समय तक जमा रहने के कारण स्कूल छुट्टी के बाद क्लास टीचर ने चोट की जानकारी पालक को दिया. इससे पहले एक माह के भीतर दो बार औऱ चोट लगा था तब भी पालक को चोट लगने की जानकारी छुट्टी के बाद ही मिलता था.

पालक ने 14 नवम्बर को बाल में मेला आयोजन के समय स्कूल के प्रिंसिपल से निवेदन किया था कि आप स्कूल के प्रमुख है बच्चों को चोट लगती है तो आप मुझे तुरंत सूचना करे ताकि मैं अपने बच्चे को ले जाकर सही समय मे उपचार कर सकूं लेकिन उसके बाद भी प्रिंसिपल ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी न निभाकर उल्टा पालक को फोन कर दुर्व्यवहार करने लगा और मैं किसी से नही डरता कह जो करना है कर लेना तुम गोल्ड मेडलिस्ट हो क्या, कहते हुए कई सारे अपशब्दों का प्रयोग कर कहा कि अपने बच्चे का नाम स्कूल से कटा कर कहि और जाकर एडमिशन करा लो कहते हुए फोन काट दिया.जबकि पालक स्कूल प्रिंसिपल को कई बार निवेदन कर चुका है कि आप सर सभी बच्चों के साथ समान व्यवहार करें।

बाल मेला के दौरान जब प्रिंसिपल उदय प्रकाश पांडेय से कहा गया कि बच्चे का रुचि संगीत में भी है आप म्यूजिक टीचर को समय निकालकर बच्चे को अभ्यास कराईए तो उन्होंने उल्टा जवाब देते हुए कहा कि मैं तो घर मे टेबल बजाकर ढोलक बजाना सीखा हु आप भी अपने बच्चे को सिखाइए या म्यूजिक स्टूमेंट खरीदकर घर मे सिखाये. जबकि स्कूल में म्यूजिक के लिए अलग से टीचर की नियुक्ति की गई है.आगे कहा कि अभी जो लर्निंग बच्चों को सीखाना है उसमें बच्चे को कारपेंटर, पेंटर, राजमिस्री सहित पकौड़े बनाना भी सीखाना है क्योंकि सभी बच्चों को नौकरी तो मिलेगा नही.

एक और पालक ने बिना नाम उजागर के शर्त पर यह बताह की प्रिंसिपल ने मेरे बच्चे को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था. जिसका शिकायत मैने विकासखंड खंड शिक्षा अधिकारी से किया था तब प्रिंसिपल ने माफी मानकर मामले को खत्म करने का निवेदन किया.

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी पीके भटनागर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि एक प्रिंसीपल को इस तरह पालकों के साथ व्यवहार नही करना चाहिए,बच्चे को चोट लगने पर उपचार कर पालक को सूचना देना उसका नैतिक जिम्मेदारी है. मैं इस मामले की जांच करवाता हु।

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