ब्रेकिंग जशपुर – बुरजुडी गांव में छुआछूत का गंभीर आरोप, सार्वजनिक नल पर पानी भरने से रोकने का दावा

जशपुर। संविधान और कानून में छुआछूत को अपराध घोषित किए जाने के बावजूद समाज में जातिगत भेदभाव की शर्मनाक तस्वीरें सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। जशपुर जिले के बुरजुडी गांव में सार्वजनिक नल से पानी भरने को लेकर घासी समाज के ग्रामीणों ने कुछ लोगों पर जातिगत भेदभाव और छुआछूत करने का गंभीर आरोप लगाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में सरकार की सार्वजनिक नल-जल योजना के तहत लगाए गए नल से पानी लेने पहुंचे उनके समाज के दयाशंकर नामक व्यक्ति को कथित तौर पर रोक दिया गया और वहां से भगा दिया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन्हें यह तक कहा गया कि “तुम घासी हो, तुम्हारा छुआ पानी हम कैसे पिएं?”
ग्रामीणों का कहना है कि मामला यहीं नहीं रुका। विवाद के बाद सरपंच और सचिव की मौजूदगी में पंचायत की बैठक बुलाई गई। आरोप है कि बैठक में पंचों और समाज के लोगों के सामने भी उन्हें कथित तौर पर जाति का हवाला देकर अपमानित किया गया। पीड़ित पक्ष के अनुसार, उन्हें यह भी कहा गया कि अगर सार्वजनिक नल से पानी लेने में परेशानी है तो वे अपना निजी बोरवेल खुद लगवाएं।

इस पूरे मामले में घासी समाज के ग्रामीणों ने रायमुनी, पति प्रकाश और तरसिला, पति सुसे समेत कुछ अन्य महिलाओं पर पानी भरने से रोकने और कथित भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित दूसरे पक्ष का बयान सामने आना बाकी है।
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित तौर पर हुए इस अपमान से उन्हें गहरी मानसिक ठेस पहुंची है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और सार्वजनिक नल से सभी ग्रामीणों को बिना भेदभाव पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब सरकारी योजना का पानी गांव के हर नागरिक के लिए है, तो आखिर जाति के नाम पर किसी को सार्वजनिक नल से पानी लेने से रोकने का अधिकार किसने दिया? प्रशासन की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

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