ब्रेकिंग न्यूज – पीएम आवास में धांधली,पति पत्नी दोनो के नाम आवास स्वीकृत, सरपंच ने कलेक्टर से की शिकायत

रोबिट गुप्ता/ बलरामपुर – केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य हर गरीब परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पचवाल से सामने आया मामला योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भारी अनियमितता की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि गांव में कई ऐसे हितग्राही हैं जिन्हें अब तक एक भी आवास नहीं मिला, जबकि कुछ परिवारों को नियमों के विरुद्ध दो-दो आवास स्वीकृत कर दिए गए।

इस मामले की शिकायत पूर्व सरपंच द्वारा कलेक्टर एवं जिला पंचायत में लिखित रूप से की गई थी। शिकायत के बाद निर्देश मै जनपद पंचायत के अधिकारियों ने जांच टीम गठित कर गांव में जांच करवाई। जांच के दौरान अधिकारियों के सामने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। बताया जा रहा है कि एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर दिए गए और इसकी राशि भी निकाल ली गई।

पंचायत में एक और गंभीर मामला सामने आया है। बजनाथ पंडो के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था, जबकि उनकी और उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद उनके परिवार के खाते में राशि भेजने के बजाय किसी अन्य रिश्तेदार के खाते में पैसा डालकर निकाल लिया गया।

बैजनाथ पंडो के पोते ने क्या कहा

जब इस मामले में बजनाथ पंडो के पोते से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस आवास के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि उनके दादा के नाम से आवास स्वीकृत हुआ है तो उसकी राशि उन्हें दी जाए ताकि वे मकान बनाकर रह सकें।

निरंजन आवास हितग्राही ने क्या कहा

वहीं गांव के एक अन्य हितग्राही निरंजन का कहना है कि उनके और उनकी पत्नी के नाम से कुल दो प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए थे। दोनों की राशि भी निकल चुकी है, लेकिन पत्नी के नाम से स्वीकृत आवास की केवल एक ही किस्त निकाली गई है, जबकि दूसरी किस्त किसी अन्य खाते में डाली जा रही है, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

वर्तमान सरपंच पुत्र ने क्या कहा

ग्राम पंचायत के सरपंच के पुत्र ने भी स्वीकार किया है कि पंचायत में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक ही परिवार को दो-दो आवास मिल गए हैं और कुछ लोगों ने इसकी राशि भी निकाल ली है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब प्रधानमंत्री आवास योजना की निगरानी के लिए आवास मित्र, रोजगार सहायक और पंचायत स्तर पर कई जिम्मेदार लोग नियुक्त हैं, तो इतनी बड़ी अनियमितता आखिर कैसे हो गई। पंचायत में रोजगार सहायक और आवास मित्र पर फर्जी मास्टर रोल बनाकर बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने के भी आरोप लगाए गए हैं, हालांकि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है

फिलहाल जांच टीम गांव पहुंचकर अपनी जांच पूरी कर चुकी है और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। अब देखना होगा कि इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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