ब्रेकिंग न्यूज :- विकास की दावों की पोल खोलती तस्वीर, छपरी के नीचे पढ़ाई कर रहे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र दर्जा प्राप्त पंडो जनजातीय के बच्चे,beo ने कहा जल्द बनेगा स्कुल भवन।

रोबिट गुप्ता – छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहें जानें वाले पंडों समाज के लोग जो कि विशेष पिछड़ी जनजाति में आते है और उनके विकास के लिए सरकार तमाम प्रकार की योजनाएं चला रही जिसके लिए अच्छा खासा फंड शासन प्रशासन के द्वारा जारी भी किया जाता है,,,  लेकिन जहां धरातल स्थिति की हम बात करें जहां इनकी सुख सुविधाओं की बात करें तो धरातल पर हमें कुछ दिखता ही नहीं।

आपको बता दें कि ऐसा ही एक मामलें सामने आया है, जहां आजादी के 78 साल बीत जानें के बाद भी यहां के स्कूली बच्चे आज भी कच्चे मकान के एक बरादें में अपना भविष्य गढ़ने पर मजबूर है जो आज भी अपने लिए एक स्कूल भवन की आस लगाए हुए बैठे है,, वहीं जहां इस मामले अब शिक्षा विभाग के अधिकारी गाँव मे जल्द ही स्कूल भवन निर्माण का आश्वासन देते हुए नजर आ रहें है।

हम बात कर रहे है छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के  वाड्रफनगर विकासखंड के पिपराडीह गांव की जो कि विशेष पिछड़ी पंडों जनजाति वाला इलाका है और यहां पर करीब 70 से 80 घरों की आबादी निवास करती है और इन्हें राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र भी माना जाता है।

लेकिन जहां शिक्षा विभाग तमाम प्रकार के दावे और वादे करता है लेकिन इस गांव में सभी दावे और वादे पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे है क्योंकि यहां पर प्राथमिक स्कूल का संचालन एक कच्चे मकान के बरादें में किया जा रहा है और इसी एक बरादें में गाँव के करीब 25 बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा है।

आखिर मैं आप सोच सकते हैं कि यहां के बच्चे आखिर में कैसे पढ़ेंगे यहां के नौनिहाल और कैसे गढ़ेंगे देश का भविष्य यह चिंतन का विषय है।

चूंकि साफ है कि इन मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा।

जहां दूसरी ओर हम बात करें शिक्षा विभाग के द्वारा यहां पर अभी तक कोई भवन का निर्माण नहीं हो पाया है और यही कारण है कि बरसात हो या चाहे गर्मी इसी कच्चे बरादें में स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

जहां आपको बता दे कि पिपराडीह गांव में चार साल पहले कोई स्कूल नहीं था और यहां के बच्चों का भविष्य अंधकार में था ग्रामीणों के शिकायत के बाद जिले के तत्कालीन कलेक्टर ने पिपराडीह में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्राथमिक स्कूल और मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन शुरू किया था लेकिन चार वर्ष बीत जानें के बाद भी प्रशासन अब तक गांव में कोई नया स्कूल भवन नहीं बना पाया है जिसके कारण स्कूल का संचालन उसी कच्चे मकान के एक बरादें में किया जा रहा है।

जहां स्कूल के शिक्षक और स्कूली बच्चे भी पढ़ाई के लिए पक्के मकान की मांग कर रहे है, लेकिन उनकी मांगे कब तक पूरी हो पाती है ये तो देखनें वाली बात होगी।

वहीँ अब इस पूरें मामलें मे विकासखंड शिक्षा अधिकारी B.E.O वाड्रफनगर मनीष कुमार के द्वारा कहां जा रहा है कि पिराडीह गांव मे जल्द ही स्कूल के लिए नये भवन निर्माण करवानें की बात कही जा रही है।

जहां देखना अब यह होगा कि क्या खबर चलनें के बाद क्या बलरामपुर शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन की नींद खुलती भी हैं या नहीं।

क्या इन बच्चों को जो इनको शिक्षा ग्रहण करनें के लिए शासन प्रशासन के द्वारा स्कूल में जो व्यवस्था मिलनी चाहिए वो मिल पाती है या नहीं यह तो देखनें वाली बात रहेगी।

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