ब्रेकिंग बलरामपुर – शासन प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा,पेड़ के निचे संचालित हो रहा आंगनबाड़ी…

रोबिट गुप्ता छत्तीसगढ़ शासन ने जमीन स्तर की समस्याओं को सीधे समझने और उनका त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से सुशासन तिहार का आयोजन किया था। गांव-गांव में शिविर लगाकर आम लोगों की समस्याएं सीधे शासन और मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का दावा किया गया, ताकि विभागीय कमियों को तुरंत दूर किया जा सके। लेकिन सवाल यह है कि जब शासन स्वयं समस्याएं सुनने के लिए गांव तक पहुंच रहा है, तो फिर विभागीय स्तर पर इतनी बड़ी और गंभीर लापरवाही कैसे हो सकती है।

हालाँकि सरकार द्वारा छोटे बच्चों को सुपोषित और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएँ चला रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती यह तस्वीर सफेद हाथी नजर आ रही है। पूरा मामला बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

रामचंद्रपुर विकासखंड की एक ग्राम पंचायत बसेरा खुर्द यादव पारा में वर्ष 1992 से अब तक आंगनबाड़ी भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। हालात यह हैं कि पिछले तीन दशकों से आंगनबाड़ी केंद्र एक आम के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर खुले आसमान के नीचे संचालित किया जा रहा है। सबसे बड़ी सवाल तो है कि इसी कैंपस में प्राथमिक स्कूल में संचालित होती है लेकिन अब तक किसी विभाग का नजर इस आंगनवाड़ी जो पेड़ के नीचे संचालित किया जा किसी का भी नजर नहीं गया और ना ही कोई पहल किया गया

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का कहना है कि जब से उनकी नियुक्ति हुई है, तब से इसी पेड़ के नीचे बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। न तो बच्चों के बैठने के लिए टाट-पट्टी है, न कार्यकर्ता के लिए कुर्सी और न ही बुनियादी सुविधाएँ। केवल मध्यान्ह भोजन की किसी तरह व्यवस्था हो पाती है।

कार्यकर्ता ने बताया कि कई बार महिला एवं बाल विकास विभाग को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात के दिनों में मजबूरी में पास के प्राथमिक स्कूल में बच्चों को बैठाया जाता है, लेकिन वहां भी अक्सर जगह की कमी बताकर भगा दिया जाता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2008-2009 में एक आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत जरूर हुआ था, लेकिन वह आज तक अधूरा पड़ा है। सवाल यह उठता है कि इतने वर्षों में सीडीपीओ, सुपरवाइजर और अन्य अधिकारी निरीक्षण के दौरान इस गंभीर कमी को कैसे नजरअंदाज करते रहे।

तीन दशक से एक पेड़ के नीचे संचालित होती आंगनबाड़ी न सिर्फ सिस्टम की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि सरकार के विकास और शिक्षा सुधार के दावों पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन कब पहल करेगी और बच्चों के सर पर छठ नसीब होगी

अब इस मामले में कलेक्टर का कहना है कि वहाँ के लिए आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किया गया है जो लंबे समय से अधूरा है,वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्राथमिक शाला का एक कक्ष दिया गया है आंगनबाड़ी संचालन के लिए। मैंने इस मामले में cdpo से जानकारी लिया तो उनका कहना है कि ठंठ की वजह से चबूतरा में एक पेड़ के नीचे लगाया जा रहा है।

-->