दीदी मां नीलम आनंद का 73वां जन्मदिवस रामानुजगंज में धूमधाम से मनाया गया, 10,000 पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

रोबिट गुप्ता – रामानुजगंज, 27 जुलाई को शिव शिष्या दीदी मां नीलम आनंद जी के 73वें जन्मदिवस के पावन अवसर पर वार्ड क्रमांक 3, रामानुजगंज में शिव शिष्यों द्वारा अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ एक भव्य आयोजन किया गया। यह दिन सेवा, संकल्प और समर्पण की मिसाल बन गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण से लेकर मानव सेवा तक की विविध गतिविधियाँ संपन्न हुईं।
“सांस हो रही है कम, आओ पेड़ लगाएं हम” — इस प्रेरणादायी नारे के साथ शिव शिष्यों ने एक सप्ताह के भीतर 7300 पौधारोपण का संकल्प लिया था, जिसे पार करते हुए लगभग 10,000 पौधे लगाए गए। क्षेत्र के नागरिकों ने इस अभियान की भूरी-भूरी प्रशंसा की और इसे समाज के लिए प्रेरणास्पद बताया।
कार्यक्रम के दौरान दीदी मां नीलम आनंद जी की प्रतिमा के समक्ष केक काटकर जन्मोत्सव मनाया गया। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्ग गुरु भाई-बहनों को साड़ी, गमछा और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समाज में सेवा और सहयोग की भावना और अधिक सशक्त हुई।
100 बिस्तरों वाले सरकारी अस्पताल में सभी मरीजों को फल और मिष्ठान वितरित किए गए, जिससे जन्मदिवस की खुशियाँ सभी तक पहुंच सकीं। इसके अतिरिक्त, नवजात शिशुओं का नामकरण संस्कार कर उन्हें शिव शिष्य के रूप में दीक्षा दी गई।

इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से पूर्व विधायक श्री बृहस्पति सिंह, विधायक प्रतिनिधि श्री शैलेश कुमार,श्रीमती शर्मिला गुप्ता,
पार्षद श्री विकास गुप्ता

सहित अन्य अनेक सम्माननीय नागरिकों ने आयोजन की सराहना की और गुरुकार्य के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
आयोजन समिति में विशेष योगदान पंचम कुशवाहा एवं मनोज गुरु भाई का रहा, जिन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।
कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रमुख गुरु भाई-बहनों में शामिल रहे

चंदन भैया, विनोद भैया, कृष्णा भैया, बिगन भाई, रामसेवक भाई, बैजनाथ भाई, शिवलाल भाई, कारण भाई, जयप्रकाश भाई, बजरंगी भाई, किशन बहन, ललिता बहन, अमृता बहन, आशा बहन, किरण बहन, चंपा बहन, देवंती बहन, प्रतिमा बहन, महीनावती बहन, अंजना बहन, शारदा बहन, बिंदु बहन, आरती बहन, सरिता बहन, सविता बहन, गुड़ी बहन, निर्मला बहन, इंदु बहन, अनीता बहन, ममता बहन, कलावती बहन, चंद्रावती बहन, सुजवंती बहन, सुचिता बहन आदि।

हजारों की संख्या में शिव शिष्यों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और गुरुकक्षा को सफल बनाया। इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि आध्यात्मिकता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा जब एक सूत्र में बंधते हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

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