खबर का असर – PMGSY विभाग ने करोड़ो की लागत से बनने वाली नाली में किया जमकर भ्रष्टाचार, सरकारी खजाने पर डाला डाका, कलेक्टर के संज्ञान में आते ही जांच टीम गठित।

रोबिट गुप्ता – दक्ष न्यूज के खबर का बड़ा असर भ्रष्टाचार मामले में कलेक्टर ने बैठाई जांच, सरकार करोड़ों रुपये भेज रही है गांवों की सड़कों और नालियों के लिए, लेकिन ज़मीन पर ये पैसा मिट्टी में मिलाया जा रहा है — वो भी सचमुच की “मिट्टी की नाली” बनाकर! चांदो थाना के चटनिया से संभाग तक बनाई जा रही सड़क और नाली निर्माण कार्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ने जो कारनामा किया, उसने विकास कार्यों की साख पर ही कीचड़ उछाल दिया है।

दक्ष न्यूज़ ने ग्रामीणों के शिकायत पर इस भ्रष्टाचार मामले को उजागर किया था, जिसमें तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से दिखाया गया कि नाली पक्की नहीं, बल्कि सिर्फ मिट्टी से पाट दी गई है — जैसे किसी ग्रामीण इलाके की अस्थायी मेड़ हो! यह वही योजना है जिसके तहत करोड़ों रुपये जारी होते हैं।

कलेक्टर की चेतावनी को भी किया था नजरअंदाज

जानकारी के अनुसार, बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने पहले ही विभाग को सख्त हिदायत दी थी कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता बर्दाश्त नही की जाएगी। लेकिन PMGSY के अफसरों ने कलेक्टर के निर्देश को नजरअंदाज कर जनता की आंखों में धूल झोंकी, और मिट्टी से ही नाली का निर्माण कर दिया।

अब उक्त मामले पर कलेक्टर ने खुद कमान संभालते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है, जो मौके पर जाकर देखेगी कि किसने कैसे मिट्टी को सीमेंट बताकर सरकारी खजाने पर डाका डाला है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या इस भ्रष्टाचार मामले में कड़ी कार्यवाही होगी या फिर खाना पूर्ति कर हिस्सेदारी तय कर दी जाएगी.क्या जांच के बाद क्या सिर्फ रिपोर्ट तैयार होगी या फिर PMGSY के EE, SDO, इंजीनियर और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई होगी? जनता जवाब मांग रही है — क्योंकि विकास के नाम पर उन्हें मिट्टी थमाई जा रही है।

इस भ्रष्टाचार मामले को जब मीडिया में प्रमुखता से दिखाया गया था तब विभाग द्वारा भ्रष्टाचार छुपाने के नियत से जनसंपर्क से खंडन जारी कर सच को दबाने का भी प्रयास किया गया था.लेकिन अब जनता जागरूक हो चुकी है जवाबदेही तय करो – यही जनता की मांग है।

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