बगीचा (जशपुर)। लगभग 50 वर्ष पूर्व निर्मित सरईपानी व्यपवर्तन योजना के राजस्व अभिलेखों को वर्तमान स्थिति के अनुरूप अद्यतन करने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। जल संसाधन विभाग के उप संभाग कांसाबेल ने तहसीलदार बगीचा को पत्र भेजकर योजना के अंतर्गत निर्मित करीब 15 किलोमीटर लंबी सिंचाई नहर के लिए अधिग्रहित भूमि का राजस्व नक्शे में विधिवत चिन्हांकन कराने तथा नियमानुसार सीमा चिन्ह (बाउंड्री पिलर) स्थापित करने का अनुरोध किया है।
यह कार्रवाई सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त एक आवेदन के आधार पर शुरू की गई है। विभाग द्वारा जारी पत्र की प्रतिलिपि कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भी भेजी गई है, ताकि दोनों विभागों के समन्वय से सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड अद्यतन करने की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जा सके।
1975 में बनी थी योजना
सरईपानी व्यपवर्तन योजना का निर्माण वर्ष 1975 में किया गया था। इसका प्रमुख स्टॉप डैम कदमटोली-घुघरी क्षेत्र में स्थित है। इसी स्टॉप डैम से निकलने वाली मुख्य नहर और उसकी शाखाएं महुआडीह सहित पांच गांवों के किसानों को पिछले कई दशकों से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। यह परियोजना क्षेत्र की कृषि व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है।
हाल ही में हुआ आधुनिकीकरण
वर्ष 2025 में योजना के आधुनिकीकरण के तहत नहर की सीमेंट कंक्रीट (सीसी) लाइनिंग का कार्य कराया गया। इससे जल रिसाव में कमी आई है, जल संरक्षण बेहतर हुआ है और किसानों को अधिक प्रभावी सिंचाई सुविधा मिलने लगी है।
राजस्व रिकॉर्ड होंगे अधिक सटीक
विशेषज्ञों का मानना है कि नहर के लिए अधिग्रहित भूमि का राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट चिन्हांकन होने से शासकीय भूमि का संरक्षण मजबूत होगा। साथ ही सीमांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी और भविष्य में सिंचाई परियोजना के संचालन, रखरखाव एवं विस्तार कार्यों के लिए सटीक राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध रहेंगे।
किसानों को होगी राहत
प्रशासन इस पहल को जल संसाधन विभाग और राजस्व विभाग के समन्वित प्रयास के रूप में देख रहा है। क्षेत्र के किसानों ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि वर्षों पुराने राजस्व अभिलेख अब वास्तविक स्थिति के अनुरूप अद्यतन होंगे। इससे न केवल परियोजना का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा, बल्कि सिंचाई व्यवस्था भी अधिक सुव्यवस्थित और विवादमुक्त बन सकेगी।
